तेरे होठों को छू लेने की प्यास अभी बाक़ी है,
तेरी बाहों में खो जाने की आस अभी बाक़ी है,
वो दो लटें जो तेरे चेहरे पे आ जाया करती हैं
उनको अपने हाथों से हटा देने की चाह अभी बाक़ी है,
तेरी एक मुस्कान से में अपने सारे दर्द भूल जाता हूँ,
जीस दर्द पे तेरी मुस्कुराहट बे-असर हो जाये
ए-खुदा ऐसा गम बनाने का तेरा इम्तिहान अभी बाक़ी है।
Tuesday, November 13, 2007
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